साहित्य अकादमी द्वारा प्रख्यात भौतिकशास्त्री एवं लेखक मणिलाल भौमिक के व्याख्यान का हुआ आयोजन

Organized by the Sahitya Akademi, a lecture by physicist and writer Manilal Bhowmik (नई दिल्ली) : साहित्य अकादमी द्वारा आज प्रख्यात भौतिकशास्त्री एवं लेखक ‘मणिलाल भौमिक’ के व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्याख्यान का शीर्षक था “मेरी किशोरावस्था में गाँधी जी के साथ बिताए गए सप्ताह एवं उसका दीर्घकालीन दार्शनिक प्रभाव”. कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने मणिलाल भौमिक का संक्षिप्त परिचय दिया और अंगवस्त्रम एवं साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें कर उनका स्वागत किया.

साहित्य अकादमी द्वारा प्रख्यात भौतिकशास्त्री एवं लेखक मणिलाल भौमिक के व्याख्यान का हुआ आयोजन

उनके वक्तव्य से पहले उन पर केन्द्रित एक वृत्तचित्र भी दिखाया गया. ‘के. श्रीनिवासराव’ ने स्वागत भाषण में कहा कि ‘साहित्य अकादमी के लिए यह बेहद गर्व और उल्लास के क्षण हैं, जब हम एक विश्व विख्यात वैज्ञानिक को अकादमी में अपने बीच पा रहे हैं. राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150वें जन्मशताब्दी वर्ष 2019 में साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित यह पहला बड़ा व्याख्यान है.’

अपने व्याख्यान के आरम्भ में मणिलाल भौमिक ने ‘गाँधी जी’ के विशाल व्यक्तित्व कि चर्चा की. उन्होंने गाँधी जी से सम्बंधित अपनी स्मृतियाँ श्रोताओं से साझा करते हुए कहा कि उस समय गांधीजी को साक्षात् देख लेना भगवान को देख लेने के बराबर था. यह उनका सौभाग्य था कि मेदिनापुर के एक कैम्प में उन्हें गाँधी जी के साथ एक सप्ताह बिताने का अवसर मिला.

साहित्य अकादमी द्वारा प्रख्यात भौतिकशास्त्री एवं लेखक मणिलाल भौमिक के व्याख्यान का हुआ आयोजन

यह 1945 कि बात है और उस समय बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी झेल रहा था. मेरी उम्र उस समय 14 वर्ष की थी. मैंने गांधीजी को बड़ी तन्मयता से चरखा चलाते हुए तो देखा बल्कि विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए भी देखा है. वे सारे किसान एक नदी के किनारे इकट्ठे हुए थे और उन तक आवाज पहुँचाने के लिए लाउडस्पीकर भी कम पड़ गए थे. लेकिन उनको सुनने के लिए इकट्ठे हुए सभी लोगों की आँखों में जो सम्मान गाँधी के लिए था उसको भूल पाना अब भी संभव नहीं है.

मणिलाल भौमिक ने अपनी जीवन यात्रा के विविध पड़ावों के बारे में बताया और जीवन की विभिन्न स्थितियों-परिस्थितियों पर गांधीजी के प्रभावों को विस्तार से रेखांकित किया. उन्होंने ‘नेलशन मंडेला’ और ‘आईन्स्टाईन’ तथा ‘मार्टिन लूथर किंग’ जैसे गांधीजी जी केक अनुयायियों का जिक्र करते हुए कहा कि गांधीजी ने भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों के लोगों को आदर्श जीवन-मूल्यों के साथ जीने और सत्य के लिए अडिग संघर्ष करने की प्रेरणा दी है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन इंग्लैंड की अत्याधुनिक जीवनशैली वाला युवक गाँधी, भारत कि गरीब जनता के दुःख-दर्द से इतना प्रभावित हुआ कि पूरे जीवन एक आम भारतीय जन बनकर जिया, और उनके लिए हर तरह की स्वतंत्रता हेतु संघर्ष किया.

साहित्य अकादमी द्वारा प्रख्यात भौतिकशास्त्री एवं लेखक मणिलाल भौमिक के व्याख्यान का हुआ आयोजन

मणिलाल भौमिक ने भौतिकशास्त्र के विभिन्न पदों और अवधारणाओं के परिप्रेक्ष्य में गांधीजी के दर्शन और सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला. इन व्याख्यान में अनेक साहित्यकार, साहित्य प्रेमी श्रोता उपस्थित थे.

Facebook Comments