चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन
चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन

26 अप्रैल, 2018 – समय-समय पर कला के तमाम विधाओं पर नए-नए प्रयोग निरंतर हुए हैं और आज भी किये जा रहे हैं. जिसके कारण कला के विभिन्न रूप हमारे सामने आते रहते हैं. जिन्हें सभी अपने समाज, जीवन, विचारधारा, सभ्यता और संस्कृति से प्रभावित होकर ही अभिव्यक्ति करते हैं. जिनमें कलाकार एक महत्वपूर्ण योगदान देता है. जो अपनी पैनी दृष्टि से समस्त घटित घटनाओं को देखता है और उसे गहराई से महसूस करता है तथा अपनी अभिव्यक्ति से संसार में एक सन्देश देने का प्रयास करता है. क्योंकि दृष्टि तो सभी के पास होती है लेकिन दृष्टिकोण का अभाव होता है.कलाकार दृष्टा होता है जो अपने दृष्टिकोण से सर्वप्रथम रचनाओं को रचता है और उन्हें हमारे सामने प्रकट करता है.

चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन
चित्रकार संजय शर्मा

यहाँ पर हम ऐसे ही दो कलाकारों की चर्चा कर रहे हैं जो उपर्युक्त सन्दर्भ को प्रकट करते हैं. इनमें से एक चित्रकार संजय शर्मा और दूसरे हैं छायाकार कुमार जिगीषु.

चित्रकार संजय शर्मा ने अपनी कलायात्रा की शुरुआत औद्योगिक नगर से छोटे से स्तर से की जो आज समकालीन चित्रकला की दुनिया में खुद को स्थापित किया है, जिसका प्रमाण इनकी रचनाएँ खुद प्रस्तुत कर रही हैं. छोटे-छोटे नगरों से बड़े शहरों में आये हुए कलाकारों को इनकी कला यात्रा मार्गदर्शन भी करती है.

चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन

 

संजय की कलाकृतियाँ तत्काल परिवेश से जुडी हुई हैं, जिसकी प्रतिक्रिया इनके चित्रों में है. जिसे इन्होंने तैल और एक्रेलिक माध्यम में कैनवास पर उकेरा है.

चित्रों में वर्तमान समाज एक भौतिक भाषा एवं परंपरा और आधुनिकता की परत है. इनके चित्रों में वर्तमान समाज पर राजनीति का एक गहरा असर दिखलाई पड़ता है, जिसके विरोध में एक ऊँची ध्वनि भी है. जिसे बड़े भोपू जो स्थान के चेहरे का स्थान लिए हुए हैं . कहीं-कहीं सामाजिक बंटवारे का विरोध तथा वर्तमान परिस्थिति में परिवर्तन की मांग भी नजर आ रही है.

चित्रकार के लिए चित्रित सतह बहुत ही महत्वपूर्ण है. यह न केवल समाज एवं खुद व इतिहास की अभिव्यक्ति है जो केंद्रीय है बल्कि विभिन्न माध्यमों में उकेरे गए रूप में और प्रयोगों की संभावनाओं के रूप में भी है. विशेष रूप से परतों और सतह निर्माण के सन्दर्भ में. चित्रों में एक प्रतिरोध भी है. शायद यह परंपरा और आधुनिकता की परतों को दर्शाता है, जिसे चित्रकार ने प्रस्तुत करने की कोशिश की है.

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चित्रकार संजय अपने आस-पास की दुनिया को अपने कला का माध्यम बनाया है. उन्हें एक अर्थ में पिरोने की कोशिश की है. निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन प्रदान किया है. इनके रंग पैलेट समय के साथ बदलते भी नजर आते हैं. चित्रों के हर चरित्र एवं वास्तु इनके अनुभवों और परिवेशों को आकार देने की कोशिश है.

माध्यम कुछ भी हो सृजनशील व्यक्ति अपनी रचनाओं से समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है. ऐसे ही छायाकार विष्णु जिगीषु हैं जिन्होंने अपनी अपनी कलायात्रा में एक लम्बा सफ़र तय किया है और आज भी लगातार अग्रसर है. साथ ही उन्होंने अपने विचारों और माध्यमों; ग्राफिक के साथ सुन्दर प्रयोग किया है. जिगीषु कहते हैं कि मैं डिजिटल में कुछ बुनियादी तत्वों के साथ कार्य करता हूं क्योंकि वह मुझे आकर्षित करते हैं और मुझ पर गहरा प्रभाव डालते हैं. जिसमे लगातार मेरी खोज जारी रहती है.

चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन
छायाकार कुमार जिगीषु

डिजिटल प्रयोग एक बहुत ही आसान तरीके से किया गया और कठिन कम का असर देता है. जिगीषु इस सरल और जटिल प्रक्रिया को अपने जीवन यात्रा के साथ जोड़ते हैं. जो छोटे शहर से शुरू होकर आधुनिकता से लैश बड़े-बड़े महानगरों में उन जटिलताओं के बीच जीवन को सरल और सफल बनाने के तरीको की खोज कर रहे हैं.

इस खोज ,में जीवन के सभी महत्वपूर्ण तत्व साथ-साथ चल रहे हैं और जो पीछे छुट गए थे उनकी भी तलाश जारी है. जिगीषु के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व अन्तराल सरंचना और संतुलन है.

चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन

कभी-कभी स्थान परिवर्तन तथा वास्तविकता को समझने के मन के तरंगो को दूर-दूर भटकने के बाद वापस और एक निश्चित प्रकार की बैचेनी के बाद एक चेतना एक ऊर्जा उत्पन्न होती है. जिगीषु की कला का उद्देश्य जीवन में गायब बिन्दुओं को ढूंढना और उन्हें प्रतिको के रूप में स्थापित करना है. जो इनके चित्रों में देखा जा सकता है.

चित्रों में कहीं छितिज का गायब हो जाना. दीवारों के बीच कैद बुनियादी जरूरतों के बीच उलझन के बाद भावनाओं का शून्यकाल में खो जाना. प्रस्तुत किये गये फोटोग्राफ्स रंगीन और श्याम स्वेत दोनों ही हैं कुछ पेपर पर तो कैनवास छापे गए हैं.

चित्रकारों ने उकेरे जिंदगी के विविध रंग! जीवन के इन सरल और जटिल रचना चित्रों ने मोह लिया सबका मन

कुछ चित्रों में अपने विचारों को डिजिटल ग्राफिक्स इफेक्ट्स के माध्यम से उनको बनाया गया है जिनके बारे में जिगीषु बताते हैं कि जैसा कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है. यहां कुछ भी स्थिर नहीं है. कहीं आकर कहीं रंग रूप निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं. कहीं तो खाली स्थान होता फिरकभी भरा होता.

कुछ खत्म होता है तो कुछ जन्म लेता है. यही प्रकृति है. जो ब्रह्मांड के बड़े सतह पर निरंतर परिवर्तन होते रहते उसी ब्रह्मांड में तलाश जारी है. मेरे मित्र बोल रहे हैं. जिगीषु अपने चित्रों को किसी शीर्षक में नहीं बांधते उन्हें स्वतंत्र रखते है. साथ ही वह ऐसा मानना है कि शीर्षक के माध्यम से दर्शकों के विचारों को प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए.

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