कला संगम त्रिवेणी : यदि आपको पत्थरों का एक ढेर दिखे तो इसे आप एक ढेर ही समझेंगेलेकिन यदि किसी ने उन्हीं  टुकड़ों को व्यवस्थित संजो कर रख दिया तो वह एक कलाकृति बन जाती है. इसी प्रकार जब मन की गहराईयों में अनेक विचार पनपते लगते हैं, जब श्वांस एक विशेष तारतम्य में चलता हो, जब एक विशेष नाड़ी खुल जाए, तब कुछ विचार निकलते हैं और एक कलाकार इन्हीं विचारों को खूबसूरती से कागज पर उकेरता है.

त्रिवेणी कला संगम : आर्ट हैरिटेज गैलरी में लगी कलाकार राजेश देब के रचना चित्रों की प्रदर्शनी, लकड़ी पर दिखी अद्भुत चित्रकारिता

ऐसे ही एक कलाकार हैं राजेश देब. जिनकी चित्रकारिता ने कलाप्रेमियों को खूब आकर्षित किया है. राजेश देब बंगाल के रहने वाले हैं और इन दिनों इनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी कला संगम त्रिवेणी की आर्ट हैरिटेज गैलरी में लगी है. इस प्रदर्शनी का विषय है “Testimony of Tolerance” (सहिष्णुता की गवाही). 

राजेश देब का सम्पूर्ण कार्य 20वीं शताब्दी में बंगाल के विशिष्ट अनुभव की गहराई पर आधारित हैं. इन्होने बड़े पैमाने पर आघातों के साथ-साथ भविष्य के लिए समृद्ध सांस्कृतिक अतीत और राजनीतिक संभावनाओं दोनों का एक विस्तृत दृष्टिकोण दर्शाया है. “Testimony of Tolerance” की श्रृंखला में लकड़ी को काटकर खुबसूरत चित्रों को आकार दिया हुआ है फिर उसमें रंग-बिरंगे रंगों को इस्तेमाल किया गया है. यह चित्र रचना एम. एम. कलबर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पंसारे की हत्याओं पर आधारित हैं.

त्रिवेणी कला संगम : आर्ट हैरिटेज गैलरी में लगी कलाकार राजेश देब के रचना चित्रों की प्रदर्शनी, लकड़ी पर दिखी अद्भुत चित्रकारिता

हाफिज, कबीर, बाबा फरीद, चैतन्य, मिराबाई और तुकाराम के चित्रों को उन्होंने अपनी चित्रकला में दर्शाया है. लकड़ी के टुकड़ों के माध्यम से, उनका उद्देश्य समकालीन अंतरिक्ष में सहिष्णुता और पारस्परिक समझ के इन वैकल्पिक वर्णनों को लाने का लक्ष्य है. चित्र प्रदर्शनी की इस श्रृंखला में समकालीन आंकड़े हैं जो हमें इन मानवीय परंपराओं से जोड़ते हैं. इन छवियों में कोई संदेश नहीं है बल्कि वे संभावनाओं की एक वार्ता खोलने की कोशिश करते हैं जो भविष्य में आगे बढ़ने के लिए गति प्रदान करता है.

लकड़ी के टुकड़ों पर चित्रकारिता और मूर्ति रचना के अलावा राजेश देब के वाटर कलर और कुछ किताबें भी इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गयी हैं. राजनीति, साहित्य और कला सभी इन पुस्तकों में एक साथ आते हैं, जिनमें कि 20 वीं शताब्दी में मनुष्य के हालातों और कुछ हास्य मुहावरों का वर्णन किया गया है.

त्रिवेणी कला संगम : आर्ट हैरिटेज गैलरी में लगी कलाकार राजेश देब के रचना चित्रों की प्रदर्शनी, लकड़ी पर दिखी अद्भुत चित्रकारिता

राजेश देब की लकड़ी पर की गयी चित्रकारिता और दृश्य कला दुनिया को और अधिक प्रभावी ढंग से देखने का एक अद्भुत जरिया है. इन्होने अपनी चित्रकला, मूर्तिकला और किताबों में लिखे अपने विचारों को बहुत ही अलग ढंग से पेश किया है जो कि कला प्रेमियों को खूब लुभा रहे हैं.

–सागर कुमार 

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