नई दिल्ली : साहित्य अकादेमी द्वारा आज वरिष्ठ कवि और साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्य केदारनाथ सिंह की स्मृति में शोक सभा का आयोजन किया गया । वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी ने केदार जी को ऐसे कवि के रूप में याद किया जो संसार से सब कुछ छूटते जाने पर चिंतित है और उसे अपनी कविता द्वारा पकड़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने उनकी कविताओं मैं इतिहास के तत्कालिक एजेंडे से दूर आम आदमी की आवाजाही को बेहद महत्त्वपूर्ण बताया।

प्रख्यात आलोचक मैनेजर पांडेय ने उनकी कविता में स्थानीयता की ऐसी जमीन को पकड़ा जिसपर भारतीयता की नींव खड़ी है। प्रसिद्ध मलयाळम् कवि एवं अकादेमी के पूर्व सचिव के. सच्चिदानंदन ने उनकी कविताओं में गाँव की स्मृतियों की चर्चा करते हुए उनको ऐसे कवि के रूप में पाया जो अपनी कविताओं की तरह ही अनूठा था।

वरिष्ठ डोगरी कवयित्री पद्मा सचदेव ने उनके भोजपुरी भाषा प्रेम को याद करते हुए उनकी सहजता को याद किया। प्रसिद्ध कवि एवं कथाकार गंगाप्रसाद विमल ने उनके सर्वजन प्रिय व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि दी। प्रख्यात कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह ने उनपर लिखी गई अपनी कहानी आधा शव आधा फूल का जिक्र करते हुए उन्हें बेहद आत्मीय और विभिन्न भाषाओं के कवियों को पसंद करने वाला महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व बताया। शोक सभा में निर्मल जैन, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, लीलाधर मंडलोई, मंगलेश डबराल, अनामिका, गोविंद प्रसाद ने उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों को याद करते हुए अपनी श्रद्धांजलि प्रस्तुत की और कहा कि अब उनके कद का कोई कवि संभवतः हमारे बीच नहीं है। शोक सभा आरंभ होने से पहले साहित्य अकादेमी द्वारा केदार जी पर निर्मित फिल्म जिसका निर्देशन के, विक्रम सिंह ने किया है, का प्रदर्शन किया गया। सर्वप्रथम साहित्य अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने साहित्य अकादेमी की तरफ से शोक संदेश प्रस्तुत किया।

शोक सभा के अंत में सभागार में उपस्थित सभी लोगों ने केदारनाथ सिंह को दो मिनट मौन रखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक सभा में केदारनाथ सिंह के पुत्र सुनील कुमार सिंह, उनकी पुत्री रचना सिंह सहित प्रमुख साहित्यकार कवि, लेखक एवं पत्रकार – केकी एन. दारुवाला, सुरेश ऋतुपर्ण, यशोधरा मिश्र, देवेन्द्रराज अंकुर, अजय तिवारी, देवेन्द्र चौबे, भारत भारद्वाज, हीरालाल नागर, रणजीत साहा, प्रेम भारद्वाज, महेश दर्पण, रेखा अवस्थी, रामकुमार कृषक, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, भारतेन्दु मिश्र, श्रीधरम आदि उपस्थित थे।

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